Tourist Places, Dholpur

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धार्मिक स्थल मचकुण्ड

मचकुण्ड नामक बहुत ही सुन्दर रमणीक धार्मिक स्थल प्रकृति की गोद में धौलपुर के निकट स्थित है। इस विशाल एवं गहरे जल कुण्ड के चारों ओर अनेक छोटे-छोटे मंदिर तथा पूजागृह पाल राजाओं के काल 775 ई. से 915 ई. तक के बने हुए है। यहां प्रतिवर्ष भादों की देवछट को बहुत बडा मेला लगता है। जिसमें हजारों की संख्या में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मचकुण्ड को सभी तीर्थों का भान्जा कहा जाता है। इस मचकुण्ड का उदगम सूर्यवंशीय 24 वे राजा मचकुण्ड द्वारा बताया जाता है। इस कुण्ड में नहाने से पवित्र हो जाते हैं। ऐसी यहां धारणा है

तालाब--शाही

    बाडी कस्बे से 2 किमी- दूरी पर धौलपुर बाडी रोड पर एक विशाल पक्की झील स्थित है। जिसे तालाब-ए-शाही कहते हैं। यह बादशाह जहांगीर के मनसबदार सुलेहखां ने 1622 ई. में बनबाई थी। यहां विदेशी पक्षियो नया शीतकालीन बसेरा बन गया है। वर्ष 1990 में यहीं पर सफेद साइबेरियन सारसों का जोडा देखा गया था। झील के किनारे बनी भव्य इमारत तत्कालीन धौलपुर नरेश उदयभानसिंह ने आधुनिक ढंग से बनवाई थी। वर्तमान में इसमें सरकारी विश्राम गृह बना हुआ है।

शेरगढ किला

चम्बल नदी के किनारे धौलपुर से 5 किमी. की दूरी पर शेरगढ़ का विशाल ऐतिहासिक किला खण्डर अवस्था में खडा हुआ है। इसका निर्माण जोधपुर नरेश मालदेव ने 1532 ई. के लगभग कराया था। इसके बाद सन 1540 ई. में शेरशाह ने इसे पुनः बनवाया इसी लिए इसे शेरग का किला कहते हैं। यहां प्राचीन विरासत के रूप में किले की दीवारों पर कई विशालकाय 25 टन वजनी अष्टधातु की तोंपे रखी हुई थीं। जिनमें हनुहुंकार नामक तोप आजकल इंदिरा पार्क में रखी हुई है। जिसकी लम्बाई 19 फीट और परिधि 10 फीट है। इन तोंपो का मुगल शैली की बडी सुन्दर चित्रकारी खुदी हुई है

शाही घण्टाघर

धौलपुर शहर में  निहाल टावर या घण्टाघर के नाम से मशहूर यह इमारत टाउनहाल रोड पर स्थित है। यह 150 फीट ऊंचा है। इसे राजा निहालसिंह ने सन 1910 में बनवाया था। यह धौलपुर के लाल पत्थर से निर्मित है। नीचे की मंजिल बारह समान महराबी दरबाजों की 120 फीट परिधि में बनी हुई है। सबसे ऊपरी मंजिल पर आठ खम्बों पर खूबसूरत छतरी टिकी हुई है। इसमें घण्टा जिसकी पच्चीस फीट की वृत्ताकार परिधि एवं बजन 600 किग्रा. है टंगा हुआ है?  इस घण्टे एवं घडी का निर्माण मैमर्स जिले एण्ड जाहन्सन्स कोयडोन कम्पनी इंलैण्ड द्वारा किया गया। यहां घण्टे में चोट मारने वाला हथौडा 5 किग्रा का है। इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है। घण्टाघर की यह इमारत इण्डो-मुस्लिम शैली का उत्कृष्ट नमूना है। इस इमारत में ऊपर तक पहुंचने के लिए 125 घुमावदार सीढियां बनी हुई हैं।  

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 चम्बल व उसके बीहड

चम्बल नदी के किनारे बसे होने से यहां वर्षा ऋतु में जल प्रवाह अधिक होने के कारण भूमि का कटाव बहुत अधिक होता है। जिससे कि चम्बल के किनारे अधिकांश क्षेत्र में कटे-फटे एवं ऊंची-नीची दरारों के बनने से सैकडों फीट गहरी घाटियां बनी हुई है। जिन्हैं चम्बल के बीहड कहा जाता है। जिन पर कोई वनस्पति नहीं उगती बल्कि नंगी है। नदी के कुछ किलोमीटर की दूरी पर संसार की सबसे पुरानी अरावली पर्वत श्रंखलाऐ 113 किलोमीटर की लम्बाई में फैली हुई हैं। जो कि सरमथुरा से प्रारम्भ होकर पूर्व की ओर राजाखेडा में समाप्त होती है।  

वन विहार

धौलपुर से 16 किमी की दूरी पर दक्षिण दिशा में प्रमुख पर्यटन स्थलों में वन विहार का महत्वपूर्ण अभ्यारण्य है। इस मनोरम वनस्थली में पर्यटकों के लिए एक खूबसूरत झील के किनारे सुविधायुक्त गैस्ट हाउस भी है। वन विहार में विभिन्न प्रकार के जंगली जानवर जैसे बघेरा नीलगाय सांभर चीतल व चिंकारा पाये जाते हैं। साथ ही सभी प्रकार के पक्षी भी देखने को मिलते हैं। इस अभ्यारण्य को देखने देश विदेश के सैकडों पर्यटक प्रतिदिन आते है।

श्री रामचन्द व हनुमान मंदिर

धौलपुर शहर से 4 किमी. की दूरी पर पुरानी छावनी में स्थित हनुमान व रामचन्द्रजी का प्रसिद्ध मंदिर है जो कि राजा कीरतसिंह के काल में निर्मित हुआ था। इसमें हनुमानजी की 7  फीट ऊंची प्रतिमा वास्तुकला की अनुपम धरोहर है। इसी मंदिर में भगवान राम की 24 अवतारों वाली अष्ट धातु की मूर्ति स्थापित है। जिसको देखते हुऐ दर्शक नहीं अघाते हैं।

सैंपऊ का शिव मंदिर

धौलपुर जिले के सैंपऊ कस्बे के निकट पार्वती नदी के पार भोले शंकर का प्राचीन काल का भव्य मंदिर बना हुआ है। यहां प्रतिवर्ष फाल्पुन व सावन माह की चौदस को विशाल मेले भरते हैं। श्रद्धालु इन  अवसरों पर गंगाजी हरिद्वार/सौंरों जी से नंगे पैर पैदल चलकर गंगाजल की कावड़ लाकर चढाते हैं और मनोकामना पूर्ण हेतु मन्नत मांगते हैं।

 

राधा विहारी मंदिर

धौलपुर शहर के अन्य धार्मिक महत्वपूर्ण स्थलों में राधा बिहारी जी का मंदिर प्रमुख स्थान रखता है। इसमें भारतीय कला को बखूबी से चूने के रंगों में उभारा है। यह धौलपुर पैलेस के पास स्थित है। इसके निकट ही धौलपुर राजपरिवार के सदस्यों की छतरियां भी हैं। जो कि स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इसमें धौलपुर स्टोन का उपयोग किया गया है।

 

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मौनी सिद्ध बाबा की मजार

शहर से 2 किमी. दक्षिण दिशा में मचकुण्ड रोड पर हिन्दू मुस्लिम एकता की प्रतीक मौनी सिद्ध बाबा की मजार स्थित है। यह मजार करीब 200 फीट ऊंची एक पहाडी पर स्थित है। यहां प्रतिदिन ( विशेषकर गुरूवार को ) मजार पर चादर एवं फूल चढाने सभी सम्प्रदायों के लोग आते हैं। वर्ष में एक बार मचकुण्ड मेले के समय यहां मुशायरा का आयोजन भी होता है। जिसमें ख्याति प्राप्त कवि भाग लेते हैं एवं सुनने हजारों का कादात में नर नारी होते हैं।

सोने का गुर्जा

धौलपुर के बाडी कस्बे से 19 किमी. दूरी पर सोने का गुर्जा नामक स्थान पर अशोक कालीन ईसापूर्व तीसरी शताब्दी का शिव मंदिर विद्यमान है जिसके गुम्बज पर शिल्पकारी का अच्छा काम किया गया है। इसके निकट एक छोटा गढ है। जो देवहंस गढी के नाम से जाना जाता है। सूबा देवहंस द्वारा निर्मित उस गढी से भारत के प्रथम स्वतंत्राता संग्राम में अंग्रेजों से मोर्चा लिया था।